Bihar News : एआई और भविष्य की पत्रकारिता पर 200वां राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न
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दिल्ली: बीते कल शाम जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे तथा भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 200वें राष्ट्रीय वेबिनार में “एआई और भविष्य की पत्रकारिता” विषय पर अत्यंत गंभीर, समसामयिक और दूरगामी महत्व का विमर्श संपन्न हुआ।
वेबिनार श्रृंखला का यह ‘द्विशतक’ केवल एक संख्या नहीं, बल्कि डिजिटल युग में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप का ऐतिहासिक दस्तावेज सिद्ध हुआ।
मुख्य वक्ता के रूप में अमर उजाला वेब सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के डिजिटल प्रमुख एवं संपादक श्री जयदीप कर्णिक ने कहा कि तकनीक आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रही है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तुलना उन्होंने एक शेर से करते हुए कहा “यदि आप शेर पर सवार हैं तो यह रोमांचक और आनंददायक अनुभव है, लेकिन यदि शेर आप पर सवार हो जाए तो स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो सकती है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई पर नियंत्रण पत्रकार के हाथ में होना चाहिए, न कि पत्रकार एआई के नियंत्रण में। एआई को उपकरण के रूप में अपनाना चाहिए, विकल्प के रूप में नहीं।
श्री कर्णिक ने कहा कि पत्रकार केवल सूचना का संवाहक नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला चिंतक होता है। सच्चा पत्रकार ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचता है, प्रश्न करता है और जनहित को केंद्र में रखकर कार्य करता है।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज ‘फैक्ट-चेक’ को केवल डिजिटल मीडिया से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि तथ्य-जांच तो पत्रकारिता की मूल आत्मा रही है। माध्यम चाहे प्रिंट हो, रेडियो या टेलीविजन—समाचार की सत्यता की पुष्टि सदैव पत्रकार की प्राथमिक जिम्मेदारी रही है। डिजिटल युग ने केवल गति बढ़ाई है, दायित्व नहीं घटाया।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई के माध्यम से पत्रकार रूटीन और दोहराव वाले कार्य—जैसे डेटा विश्लेषण, ट्रांसक्रिप्शन, प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार करना—कम समय में कर सकते हैं। इससे उन्हें रचनात्मक, विश्लेषणात्मक और खोजी पत्रकारिता के लिए अधिक समय मिल सकता है।
उनके अनुसार एआई एक अनिवार्य क्रांति है—इसे रोका नहीं जा सकता, परंतु इसे विवेक और नैतिकता के साथ दिशा दी जा सकती है। पत्रकारिता का भविष्य तकनीक से संघर्ष में नहीं, बल्कि संतुलित सह-अस्तित्व में है।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि एआई पत्रकारिता का अंत नहीं, बल्कि उसका पुनर्जागरण है। यह तकनीक पत्रकारिता को अधिक तीव्र, सटीक और डेटा-सक्षम बना रही है, किंतु साथ ही नैतिकता, पारदर्शिता और सत्य की कसौटी को और कठोर बना रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य का पत्रकार केवल रिपोर्टर नहीं होगा, बल्कि डेटा विश्लेषक, तकनीक-सक्षम सृजनकर्ता और तथ्य-जांच का सजग प्रहरी होगा। डीपफेक, एल्गोरिद्मिक पक्षपात और ‘इको चैंबर’ जैसी चुनौतियाँ हमें चेतावनी देती हैं कि तकनीक पर नियंत्रण हमारा रहे। पत्रकारिता की वास्तविक शक्ति मानवीय संवेदना, आलोचनात्मक दृष्टि और सामाजिक उत्तरदायित्व में निहित है—और यही गुण उसे भविष्य में भी प्रासंगिक बनाए रखेंगे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में भारती विद्यापीठ की सहायक प्राध्यापक सुश्री प्रियंका सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर आयोजन को गरिमा प्रदान की। तत्पश्चात वक्ता को ई-पुस्तक एवं ई-स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन की सफलता में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार, अंबुश (भारती विद्यापीठ) तथा डॉ. पृथ्वी सेंगर (आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अंत में सभी प्रतिभागियों और दर्शकों से आग्रह किया गया कि वे इस सार्थक विमर्श को व्यापक स्तर पर साझा करें तथा वीडियो को ‘पसंद’, ‘टिप्पणी’, ‘साझा’ और ‘सब्सक्राइब’ कर आगामी वेबिनारों से जुड़े रहें।
यह 200वाँ राष्ट्रीय वेबिनार केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि तकनीक और पत्रकारिता के संगम पर खड़े एक नए युग की सशक्त उद्घोषणा था।
रिपोर्ट: आशीष रंजन पत्रकार
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )
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