बरेली। कभी-कभी किसी डॉक्टर का सबसे बड़ा इलाज दवा नहीं, बल्कि समय रहते समाज को दी गई चेतावनी होती है।
बरेली। कभी-कभी किसी डॉक्टर का सबसे बड़ा इलाज दवा नहीं, बल्कि समय रहते समाज को दी गई चेतावनी होती है। बरेली के मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. विश्राम सिंह ने ऐसा ही एक सराहनीय कदम उठाते हुए एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल के खिलाफ जनपद को जागरूक करने की मुहिम छेड़ दी है।
आज के दौर में सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी और जल्द राहत पाने की जल्दबाजी ने लोगों को दवाओं के प्रति लापरवाह बना दिया है। सामान्य सर्दी-जुकाम, हल्का बुखार या खांसी होते ही लोग बिना डॉक्टर की सलाह सीधे मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीदकर सेवन करने लगते हैं। यही आदत भविष्य में गंभीर खतरे का कारण बन सकती है।
CMO डॉ. विश्राम सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिना परामर्श एंटीबायोटिक लेना खुद अपने स्वास्थ्य और भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक का गलत, अधूरा या अनावश्यक उपयोग शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पैदा करता है। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में जब कोई गंभीर संक्रमण होगा, तब दवाएं असर करना बंद कर देंगी और इलाज बेहद कठिन हो जाएगा।
डॉ. विश्राम सिंह इस समस्या को केवल एक चिकित्सक की दृष्टि से नहीं, बल्कि एक अभिभावक की तरह महसूस कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह लड़ाई सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि समाज के हर व्यक्ति तक सही संदेश पहुंचाना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से CMO ने पूरे जिले के स्वास्थ्य तंत्र को सक्रिय कर दिया है। सभी स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और गांव-गांव जाकर लोगों को समझाएं कि एंटीबायोटिक कोई सामान्य गोली नहीं है।
यह नियंत्रित इलाज का हिस्सा है, जिसे जांच, सही खुराक और पूरी अवधि के साथ ही लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा खतरा जानकारी की कमी नहीं, बल्कि अधूरी और गलत जानकारी है। यही कारण है कि जागरूकता को इलाज से ऊपर रखते हुए स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सचेत कर रहा है।
CMO विश्राम सिंह का यह अभियान बताता है कि वे सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के सच्चे प्रहरी हैं। उनकी संवेदनशील सोच और दूरदर्शी पहल उन अनदेखे खतरों से लड़ रही है, जो चुपचाप समाज की सेहत को कमजोर कर रहे हैं।
यह पहल न केवल बरेली बल्कि पूरे समाज के लिए एक मजबूत संदेश है दवा से पहले समझ, और इलाज से पहले सावधानी।
रिपोर्ट: रोहिताश कुमार भास्कर,
बरेली,
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )
बरेली। वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच अब यह मामला अदालत तक पहुंच गया है।
