बरेली: जेल के बाहर रील, उड़ा मजाक

बरेली: जेल के गेट पर रील का ‘भौकाल’, रिहाई के बाद सिस्टम को ठेंगा दिखाता युवक 🚔📱

जेल सुधार केंद्र या रील बनाने का स्टूडियो?

सुरक्षा के सबसे सख्त घेरे वाली जगह यानी बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र स्थित केंद्रीय कारागार-2, बरेली के मुख्य द्वार से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है। जेल से रिहा होते ही एक युवक ने फिल्मी अंदाज में अपनी ‘दबंगई’ का प्रदर्शन करते हुए रील बनाई और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। यह वीडियो न केवल जेल प्रशासन की सतर्कता पर सवाल उठाता है, बल्कि कानून के डर को भी चुनौती देता नजर आ रहा है।

रील का ‘गैंगस्टर’ अंदाज और समाज पर असर 📉

वीडियो में युवक का व्यवहार ऐसा है मानो जेल जाना कोई सजा नहीं, बल्कि एक ‘स्टेटस सिंबल’ (सम्मान का प्रतीक) हो:

  • दबंगई का प्रदर्शन: बैकग्राउंड म्यूजिक, एटीट्यूड और चाल-ढाल के जरिए युवक ने खुद को एक रील ‘गैंगस्टर’ के रूप में पेश किया है।

  • अपराध का महिमामंडन: ऐसी गतिविधियां समाज में अपराध को ‘हीरो’ की तरह पेश करती हैं, जो युवाओं के लिए गलत संदेश है।

  • प्रोटोकॉल का उल्लंघन: जेल के मुख्य गेट पर, जहाँ सुरक्षा प्रोटोकॉल सबसे कड़े होने चाहिए, वहां खुलेआम मोबाइल का उपयोग और रील शूटिंग सिस्टम की पोल खोलती है।

प्रशासन और सुरक्षा पर उठते बड़े सवाल 🏛️

इस घटना ने बरेली जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है:

  1. डिजिटल मॉनिटरिंग का अभाव: क्या रिहा होने वाले अपराधियों की गतिविधियों पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही?

  2. सुरक्षा चूक: जेल के मुख्य द्वार पर इस तरह का तमाशा सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में कैसे संभव हुआ?

  3. सुधार केंद्र की भूमिका: क्या जेल अपराधियों को सुधारने के अपने मूल उद्देश्य में सफल हो पा रही हैं या ये केवल रील स्टार बनाने की फैक्ट्री बन गई हैं?

सोशल मीडिया पर वायरल और आक्रोश 🤝

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर जेल के दरवाजे पर ही कानून का डर खत्म हो जाएगा, तो समाज में सुरक्षित महसूस करना मुश्किल होगा। पुलिस अब इस मामले की जांच और युवक की पहचान करने में जुटी है।


मुख्य जानकारी:

  • स्थान: केंद्रीय कारागार-2, बिथरी चैनपुर, बरेली।

  • मामला: रिहाई के बाद जेल गेट पर दबंगई वाली रील।

  • चिंता: अपराध का गिरता हुआ कानूनी डर और बढ़ता महिमामंडन।


बरेली से रोहिताश कुमार भास्कर

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )


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