बरेली। नीरज मौर्या ने जनपद बरेली पहुंचकर प्रदेश सरकार और मंत्रियों की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया।
उत्तर प्रदेश की सभी बड़ी छोटी खबरों की जानकारी जानने के लिए जुड़े रहिए ऑल राइट्स मैगज़ीन के साथ.
बरेली। नीरज मौर्या ने जनपद बरेली पहुंचकर प्रदेश सरकार और मंत्रियों की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने बरेली में एम्स (AIIMS) की स्थापना में हो रही देरी और गौशालाओं की खराब स्थिति को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद बरेली में एम्स लाने की बात वर्षों से सिर्फ “प्रयास” तक सीमित है।
जब केंद्र और प्रदेश दोनों में एक ही दल की सरकार है तो ठोस परिणाम क्यों नहीं दिख रहे? जनता अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहती है।
बरेली में एम्स स्थापना पर सवाल नीरज मौर्य ने कहा कि बरेली जैसे बड़े जिले को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सख्त जरूरत है। यदि सरकार गंभीर होती तो अब तक एम्स की स्थापना की दिशा में ठोस कदम उठाए जा चुके होते। उन्होंने मंत्री स्तर पर बार-बार “प्रयास जारी है” कहने को जनता के साथ मजाक बताया।
सांसद के अनुसार, एम्स की स्थापना से न केवल बरेली बल्कि आसपास के जिलों के लोगों को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने सरकार से स्पष्ट समयसीमा घोषित करने की मांग की।
गौशालाओं की बदहाल स्थिति पर मंत्री को घेरा
प्रदेश में गौशालाओं में गायों की मौत के मुद्दे पर सांसद ने पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह को सीधे तौर पर घेरा।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के निवास क्षेत्र के पास स्थित गौशाला में गायें भूख-प्यास से तड़पकर मर रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है।
सांसद ने कहा कि यदि मंत्री के क्षेत्र की गौशाला की यह स्थिति है तो पूरे प्रदेश की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सच्चाई जनता के सामने लाने की मांग की।
इस्तीफे की मांग और निष्पक्ष जांच की अपील
नीरज मौर्य ने कहा कि यदि जांच में लापरवाही या कुप्रबंधन की पुष्टि होती है तो संबंधित मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने दो टूक कहा कि गौशालाओं की बदहाल स्थिति सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करती है।
सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि क्षेत्र में विकास कार्य और व्यवस्थाएं दुरुस्त होती हैं तो वे सार्वजनिक रूप से धन्यवाद देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वर्तमान हालात चिंता का विषय हैं।
रिपोर्ट: रोहिताश कुमार भास्कर,
बरेली,
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )
