बरेली। लाल रंग से सुशोभित ऐतिहासिक बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हो गई है।

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बरेली। लाल रंग से सुशोभित ऐतिहासिक बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हो गई है। शासन स्तर से गुरुवार को महाविद्यालय प्रबंधन से विस्तृत प्रस्ताव और डाटा मांगा गया है।

इसके बाद से प्राचार्य स्तर पर कॉलेज से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां जुटाने का कार्य तेज़ कर दिया गया है।

इस मुद्दे को विधान परिषद सदस्य बहोरन लाल मौर्य ने परिषद में चर्चा के लिए रखा है। वहीं एमएलसी साकेत मिश्र ने भी ‘बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने’ के प्रस्ताव का समर्थन किया है। लंबे समय से कॉलेज के शिक्षक, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि अलग-अलग मंचों से यह मांग उठाते रहे हैं।

सचिव देव मूर्ति का बयान: “बोर्ड का जो निर्णय होगा, वही मान्य होगा”

देव मूर्ति, सचिव, बरेली कॉलेज प्रबंध समिति ने स्पष्ट किया कि कॉलेज के संबंध में बोर्ड का जो भी निर्णय होगा, वही मान्य होगा।

उन्होंने बताया कि फिलहाल बोर्ड गठन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन शासन से प्रस्ताव मांगे जाने के बाद आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

शासन से पत्र के बाद तेज हुई तैयारी शासन से संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी द्वारा भेजे गए पत्र के बाद क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. सुधीर कुमार चौहान ने प्राचार्य और प्रबंध समिति सचिव से कॉलेज से संबंधित समस्त सूचनाएं मांगी हैं।

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय ने बताया कि ऐतिहासिक संस्थान को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव शासन स्तर से मांगा गया है। इसके लिए कॉलेज की स्थापना, छात्र संख्या, संकाय, अधोसंरचना और उपलब्धियों का विस्तृत डाटा तैयार किया जा रहा है, जिसे शीघ्र ही उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।

ऐतिहासिक महत्व और शैक्षणिक पहचान स्थापना वर्ष: 1837 शुरुआती छात्र संख्या: 57 वर्तमान छात्र संख्या: 14,000 से अधिक 1857 की क्रांति में अहम भूमिका वर्ष 2012 में NAAC ‘A’ ग्रेड प्राप्त

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज में सभी प्रमुख विषयों के संकाय, अनुभवी प्रोफेसर और छात्रावास की सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रदेश ही नहीं, अन्य राज्यों और जिलों से भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां उच्च शिक्षा ग्रहण करने आते हैं।

लखनऊ-दिल्ली के बीच केंद्रीय विवि की कमी

एमएलसी बहोरन लाल मौर्य ने कहा कि लखनऊ और दिल्ली के बीच कोई केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं है। बरेली कॉलेज में दूर-दराज से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं, ऐसे में इसकी ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्ता को देखते हुए इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाना आवश्यक है।

कैंट विधायक संजीव अग्रवाल ने भी विधानसभा में इस मांग को उठाया था। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने से क्षेत्र में उच्च शिक्षा, शोध और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

यदि बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलता है, तो राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक पहचान मजबूत होगी शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा बाहरी राज्यों के छात्रों की संख्या बढ़ेगी क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी शासन स्तर से प्रस्ताव मांगे जाने के बाद अब सभी की निगाहें आगामी निर्णय पर टिकी हैं। शिक्षक, विद्यार्थी और प्रबंधन इस ऐतिहासिक पहल को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट: रोहिताश कुमार भास्कर,
बरेली,

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

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