बरेली वक्फ संपत्ति पर कब्जे और फर्जीवाड़े के बाद अब उसमें लगे पेड़ों की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया

बरेली। वक्फ संपत्ति पर कब्जे और फर्जीवाड़े के बाद अब उसमें लगे पेड़ों की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बरेली जिले की तहसील बहेड़ी क्षेत्र के ग्राम जाम सावंत जनूबी की वक्फ संपत्ति पर खड़े करीब 160 यूके लिप्टिस, पाकड़, नीम, आम और जामुन के कीमती पेड़ विपक्षियों द्वारा चोरी से काटकर बेच दिए जाने का आरोप लगा है।

प्रार्थिनी शाकरा परवीन पत्नी स्व. सलीम अली ने जिलाधिकारी बरेली को प्रार्थना पत्र देकर विपक्षियों पर वक्फ की जमीन को लूटने और पेड़ों को अवैध रूप से बेचकर रकम हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है।

वक्फ संपत्ति पर पुराना विवाद, अदालत में मामला लंबित

प्रार्थिनी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उनके ससुर मोहतशिम अली और सास इंतज़ारुलनिशा ने 1939 में ग्राम जाम सावंत जनूबी की गाटा संख्या 6513, 651 ब, 651 ज, 652 और 653 कुल रकबा 2.2610 हेक्टेयर को वक्फ अल्लाहताला के नाम रजिस्टर्ड कर दिया था। यह भूमि वक्फ बोर्ड लखनऊ में पंजीकृत है और इस पर ईदगाह, छोटी मस्जिद भी बनी हुई है।

इसके बावजूद विपक्षियों के पिता/दादा जफर अली ने 1965 में चकबंदी अधिकारियों की मिलीभगत से वक्फ का नाम खारिज कराकर अपनी मिल्कियत दर्ज कराई। इस धोखाधड़ी के खिलाफ मामला सिविल जज सीडी बरेली की अदालत में विचाराधीन है, वहीं 1965 के आदेश के खिलाफ चकबंदी अपील भी दाखिल है।

मुतवल्ली का अधिकार, मगर विपक्षियों ने बेचे पेड़

शाकरा परवीन का कहना है कि इस वक्फ संपत्ति पर वर्तमान मुतवल्ली उनके देवर मोहसिन अली हैं, जिनका नाम वक्फ बोर्ड में दर्ज है। भूमि पर लंबे समय से बाग-बाजार और सैकड़ों पेड़ लगे हुए हैं जिनकी आमदनी से ईदगाह और मस्जिद की तामीरात व धार्मिक कार्य सम्पन्न किए जाते हैं।

लेकिन हाल ही में विपक्षियों तसव्वर अली, उमर अली, गुलजार अली, बाला नसीब और उजाला नसीब ने मिलकर यूके लिप्टिस के 160 पेड़ों सहित कई कीमती पेड़ों को चोरी से काटकर बेच दिया और पूरी रकम हड़प ली।

जिलाधिकारी से कड़ी कार्रवाई की मांग प्रार्थिनी ने मांग की है कि विपक्षियों के खिलाफ वक्फ की संपत्ति से जुड़े इस बड़े पेड़ चोरी कांड पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि वक्फ संपत्ति की सुरक्षा हो सके।

यह मामला न सिर्फ वक्फ संपत्ति की लूट बल्कि धार्मिक संस्थान से जुड़े संसाधनों की बर्बादी का भी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संगीन मामले पर कितनी सख्ती दिखाता है।

बरेली से रोहिताश कुमार की रिपोर्ट

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