दिल्ली के 11 अस्पताल PPP मॉडल पर चलेंगे
🏥 दिल्ली सरकार का गेम-चेंजर प्लान: 11 निर्माणाधीन अस्पताल अब PPP मॉडल पर, जुड़ेंगे 10,000 से अधिक बेड
🎯 मुख्य कीवर्ड्स: दिल्ली अस्पताल PPP मॉडल, 11 अस्पताल निजीकरण, स्वास्थ्य ढांचा विस्तार, 10073 बेड दिल्ली, ICU बेड योजना
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार और अटकी हुई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। सरकार ने अपने 11 निर्माणाधीन अस्पतालों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के ज़रिए चलाने की योजना बनाई है। इस कदम से दिल्ली की स्वास्थ्य क्षमता में 10,073 नए बेड जुड़ेंगे, जिनमें 4,314 ICU बेड शामिल हैं।
इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव की वित्तीय, तकनीकी और संचालन व्यवस्था का आंकलन करने के लिए एक विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) कराने हेतु टेंडर जारी कर दिया है।
📈 अटकी परियोजनाएं होंगी पूरी, 9,000 करोड़ का बोझ घटेगा
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का प्राथमिक मकसद स्वास्थ्य ढांचे का तेजी से विस्तार करना और लंबे समय से लटकीं परियोजनाओं को पटरी पर लाना है।
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बेड क्षमता: इस योजना के तहत चार सामान्य अस्पताल और सात ICU बेड वाले अस्पताल शामिल हैं। कुल 10,073 नए बेड जुड़ेंगे।
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वित्तीय राहत: अनुमान है कि यदि इन सुविधाओं को पूरी तरह से सार्वजनिक क्षेत्र में पूरा किया जाता, तो लगभग 9,000 करोड़ रुपये की लागत आती और 42,000 से ज़्यादा पदों का सृजन करना पड़ता। PPP मॉडल से यह वित्तीय बोझ कम होगा।
🏢 ये 11 अस्पताल हैं शामिल
व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) के लिए जिन 11 अस्पतालों को चुना गया है, वे दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं और लगभग बनकर तैयार हैं या निर्माण के अग्रिम चरण में हैं।
| अस्पताल का नाम | बेड क्षमता | अस्पताल का नाम | बेड क्षमता |
| नए सामान्य अस्पताल | ICU बेड वाले अस्पताल | ||
| ज्वालापुरी | 691 | गुरु तेग बहादुर अस्पताल | 1,912 |
| मादीपुर | 691 | गीता कॉलोनी | 610 |
| हस्तसाल | 691 | शालीमार बाग | 1,430 |
| सिरसपुर | 1,164 | सुल्तानपुरी | 525 |
| सरिता विहार | 336 | ||
| रघुबीर नगर | 1,565 | ||
| अतिरिक्त: | किराड़ी (काम शुरू होना बाकी) | 458 |
🤝 PPP मॉडल की रूपरेखा: मुफ्त बनाम भुगतान
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि PPP मॉडल के तहत निजी एजेंसियां न केवल शेष निर्माण कार्य को पूरा कराएंगी और उपकरण स्थापित करेंगी, बल्कि अस्पताल के संचालन के लिए भी ज़िम्मेदार होंगी। सरकार का काम सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी रखना होगा।
व्यवहार्यता अध्ययन के परिणामों के आधार पर, एग्रीमेंट में मुफ्त और पेड मरीजों के अनुपात को भी तय किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईडब्ल्यूएस, बीपीएल, और कम व मध्यम आय वाले वर्गों को भी सेवाएँ मिल सकें। हर परियोजना को उसकी लोकेशन, क्षमता और सेवाओं की रेंज के आधार पर एक स्टैंडअलोन केस के रूप में माना जाएगा।
यह योजना दिल्ली के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई बहस छेड़ सकती है कि क्या PPP मॉडल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुँच को बनाए रख पाएगा।
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