गोरखपुर में शौचालयों की दुर्दशा उजागर

गोरखपुर: शौचालयों की दुर्दशा पर उपनिदेशक पंचायत सख्त, सभी जिलों में सत्यापन और मरम्मत के आदेश!

गोरखपुर में व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालयों की खराब स्थिति पर अब प्रशासन सख्त हो गया है। दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद उपनिदेशक पंचायत (गोरखपुर मंडल) हिमांशु शेखर ठाकुर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे मंडल के डीपीआरओ को निरीक्षण टीमें गठित कर स्थलीय सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि **लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

समाचार प्रकाशित होते ही प्रशासन हरकत में आया

दैनिक जागरण ने 19 और 20 नवंबर के अंकों में सामुदायिक और व्यक्तिगत शौचालयों की दुर्दशा पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। गंदगी, बंद शौचालय, टूटी सीटें, पानी-बिजली की कमी और साफ-सफाई न होने जैसी शिकायतों ने प्रशासन का ध्यान खींचा।

रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए उपनिदेशक ने तत्काल सभी जिलों को निर्देशित किया कि—

सामुदायिक शौचालयों का *स्थलीय सत्यापन* किया जाए
व्यक्तिगत शौचालयों की दुरुस्ती तुरंत सुनिश्चित की जाए
जिम्मेदार कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

सामुदायिक शौचालय—कागजों में साफ, जमीन पर गंदगी

पत्र में उपनिदेशक ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालयों की देखभाल के लिए महिला स्वयं सहायता समूह की एक सदस्य को केयरटेकर नियुक्त किया गया है, जिन्हें—

₹6,000 मासिक मानदेय
₹3,000 रखरखाव मद

मिलता है।

इसके बावजूद निरीक्षण और मीडिया रिपोर्टों में कई स्थानों पर—

* शौचालय बंद मिलने
* पानी-बिजली न होने
* नियमित सफाई न होने
* गंदगी और बदहाल स्थिति

की पुष्टि हुई है। इसे उपनिदेशक ने “निंदनीय और अत्यंत चिंताजनक” बताया।

तीन दिन में रिपोर्ट अनिवार्य

जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक डीपीआरओ को—

* तात्कालिक निरीक्षण टीम बनानी होगी
* सभी सामुदायिक शौचालयों का सत्यापन कराना होगा
* यूजर रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा
* शौचालय समय से खुले-बंद हों इसका कड़ाई से पालन कराया जाएगा
* केयरटेकर को पारिश्रमिक समय से देना सुनिश्चित करना होगा

तीन दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजनी है।

व्यक्तिगत शौचालयों की बदहाली पर भी नाराजगी

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत बने चार–पांच साल पुराने व्यक्तिगत शौचालयों की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई है। कई स्थानों पर—

* दरवाजे गायब
* सीट टूटी
* छत टपकना
* पाइपलाइन खराब
* शौचालय बेकार होकर बंद

जैसी शिकायतें मिलीं।

पूर्व आदेशों के अनुसार इनकी रेट्रोफिटिंग के लिए ₹5,000 तक की सीमा तय की गई थी और पोर्टल पर मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी थी। लेकिन कई रिपोर्टें फर्जी पाई गईं।

15 दिनों में सत्यापन, फर्जी रिपोर्ट पर कार्रवाई

उपनिदेशक ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है—

* 15 दिनों के भीतर टीम बनाकर व्यक्तिगत शौचालयों का लाभार्थीवार निरीक्षण करें
* सही स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मिशन कार्यालय भेजें
* पोर्टल पर की गई फर्जी रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई करें
* सभी टूटे-फूटे शौचालयों की तत्काल मरम्मत कराएं
* तीन दिनों में प्रारंभिक कार्यवाही रिपोर्ट भेजें


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