⚡️ UP स्मार्ट मीटर विवाद: जांच और रोक की मांग
⚡️ ब्रेकिंग: यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर घमासान! उपभोक्ता परिषद ने लगाई तत्काल रोक की मांग, चीनी कंपोनेंट्स की होगी जांच
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों को लेकर विवाद गरमा गया है। मीटरों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व का प्रस्ताव (याचिका) दाखिल किया है। परिषद ने इन मीटरों की स्थापना पर तत्काल रोक लगाने और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
🛑 सीपीआरआइ जांच रिपोर्ट आने तक भुगतान रोकने की मांग
परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मुलाकात कर यह प्रस्ताव सौंपा। प्रस्ताव में मुख्य रूप से निम्नलिखित शिकायतें और मांगे उठाई गई हैं:
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गुणवत्ता पर सवाल: परिषद ने आरोप लगाया है कि दो मीटर निर्माता कंपनियों— लिंकवेल टेली सिस्टम्स और एप्पलटोन इंजीनियर्स—के सिंगल फेज इलेक्ट्रॉनिक मीटर जांच में तय मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें डिस्प्ले में गड़बड़ी और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की खराब गुणवत्ता के मामले सामने आए हैं।
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जांच की मांग: परिषद की मांग है कि सभी कंपनियों के स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नमूने सीपीआरआइ (केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान) को जांच के लिए भेजे जाएं।
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चीनी कंपोनेंट्स: परिषद ने मीटरों में बड़े पैमाने पर चीनी कंपोनेंट्स लगाए जाने की भी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
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भुगतान पर रोक: जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित कंपनियों का भुगतान रोका जाए।
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उपभोक्ता विकल्प: विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को पोस्टपेड या प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाने का विकल्प दिया जाए।
⚖️ पावर कारपोरेशन का दावा: मीटर तेज नहीं
दूसरी ओर, पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज किया है और स्मार्ट मीटरों को पूरी तरह सही, पारदर्शी और उपयोगी बताया है।
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चेक मीटर: प्रबंधन का कहना है कि उपभोक्ताओं की संतुष्टि के लिए 3.41 लाख चेक मीटर लगाए गए हैं और एक भी स्मार्ट मीटर तेज चलते हुए नहीं पाया गया है।
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कानूनी स्थिति: कारपोरेशन ने टैरिफ आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में स्मार्ट मीटर नहीं बदले जा सकते हैं। आयोग ने भी कहा है कि जब तक कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होती, उपभोक्ता को सही मीटर दिया जाना चाहिए।
अब नियामक आयोग इस मामले में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों पर रोक लगाने और उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी करता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।
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